तरीके और तकनीक

म्यूचुअल फंडस

म्यूचुअल फंडस
बाजार की तेजी में भी ये मिडकैप-स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स दे रहे है निगेटिव रिटर्न्स, क्या करें निवेशक

म्यूचुअल फंडस

ध्यान एक डराने वाली प्रक्रिया की तरह लग सकता है, लेकिन यह सरल है। विवरण में आने से पहले, यहाँ ध्यान करने के फायदे हैं। ध्यान आपको शांत करता है। अनुसंधान ने साबित किया है कि ईईजी गतिविधि ध्यान प्रक्रिया के दौरान कम हो जाती है। आपके मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बढ़ता है। ध्यान का अभ्यास करने वाले लोगों को कम नींद की आवश्यकता होती है। ध्यान उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है और मस्तिष्क में मस्तिष्क का क्रियाशील पदार्थ को बढ़ाता है। ध्यान बढ़ाता है ध्यान केंद्रित करने और प्रवाह की सुविधा। जब आप ध्यान करेंगे तो आप कम समय में शिथिल होंगे और कम समय में अधिक करेंगे। ध्यान छात्रों के लिए इम्तहान गणना बढ़ाता है। यह अभ्यास आपके दिमाग को अपवित्र विचारों की अनुमति देकर परिप्रेक्ष्य प्राप्त करने में मदद करता है। ध्यान के और भी कई फायदे हैं। यह अध्याय श्वास ध्यान के ब

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Adidas Wilson: लेखक ने यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया है कि प्रकाशन के समय इस पुस्तक की जानकारी सही हो। लेखक यह नहीं मानता है और इसके कारण किसी भी पार्टी को किसी भी नुकसान, क्षति, या त्रुटियों या चूक के कारण होने वाले व्यवधान के लिए किसी भी दायित्व का खुलासा होता है, चाहे ऐसी त्रुटियां या चूक दुर्घटना, लापरवाही या किसी अन्य कारण से उत्पन्न हों।
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कोरोना से हारा Mutual Fund, फ्रैंकलिन ने अचानक बंद की 6 स्कीम, निवेशक सदमें में

mutual fund

नई दिल्ली: कोरोनावायरस ( coronavirus ) की वजह से पूरी दुनिया के शेयर मार्केट का हाल बुरा है । ऐसे में जब बाजार हर दिन धड़ाम हो रहा था तब भी एक्सपर्ट्स mutual fund में पैसा लगाने की बात कह रहे थे। सभी इन्हें सेफ मान रहे थे या दूसरे शब्दों में कहें तो इन्हें कोरोना के असर से बेअसर माना जा रहा था । लेकिन अब कोरोना ने म्युचुअल फंडस ( mutual funds ) को भी अपनी चपेट में ले लिया है।

कोरोना वायरस महामारी के चलते फ्रैंकलिन टेंपलटन म्यूचुअल फंड ( Franklin Templeton Mutual Fund ) ने भारत में अपने 6 स्कीम्स को बंद कर दिया है। यानि अगर आपने भी इन फंड्स में निवेश कर रखा है तो ये आपके लिए बुरी खबर हो सकती है। आपको मालूम हो कि ये पहली बार होगा जबकि निवेश करने वाली किसी संस्था ने कोरोना के कारण अपनी योजनाओं को बंद करने का फैसला किया है।

ये 6 स्कीम्स हुई है बंद- कंपनी ने फ्रैंकलिन इंडिया लो ड्यूरेशन फंड, फ्रैंकलिन इंडिया डायनेमिक एक्यूरल फंड, फ्रैंकलिन इंडिया क्रेडिट रिस्क फंड, फ्रैंकलिन इंडिया शॉर्ट टर्म इनकम प्लान, फ्रैंकलिन इंडिया अल्ट्रा शॉर्ट बॉन्ड फंड और फ्रैंकलिन इंडिया इनकम अपॉर्चुनिटीज फंड नाम की 6 स्कीम्स को बंद कर दिया है।

इस वजह से लिया फैसला- दरअसल इस समय लोग तेजी से मार्केट से अपा पैसा निकाल रहे है । जिसकी वजह से कंपनी को इस फैसले के लिए मजबूर होना पड़ा । शेयर बाजार को दी गई जानकारी में फ्रैंकलिन टेंपलटन म्यूचुअल फंड ने यूनिट रिटर्न करने और बॉन्ड बाजार में लिक्विडिटी की कमी को स्कीम्स बंद करने का कारण बताया है। कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि, ‘‘कोविड-19 संकट और भारतीय अर्थव्यवस्था के लॉकडाउन के चलते कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के कुछ हिस्से में लगातार नकदी में गिरावट आई है, जिससे निपटना जरूरी है। ऐसे में म्यूचुअल फंड, खासतौर से निश्चित आय कैटेगरी में, लगातार यूनिट वापस लेने के दबाव का सामना कर रहे हैं।‘’

बाजार की तेजी में भी ये मिडकैप-स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स दे रहे है निगेटिव रिटर्न्स, क्या करें निवेशक

शेयर बाजार की तेजी में रिलायंस का मिड-स्मॉलकैप फंड, L&T मिडकैप फंड, DSP बीआर स्मॉल-मिडकैप म्यूचुअल फंड ने पिछले एक महीने में 3% का निगेटिव रिटर्न दिया है।

Ankit Tyagi
Updated on: May 27, 2017 11:05 IST

बाजार की तेजी में भी ये मिडकैप-स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स दे रहे है निगेटिव रिटर्न्स, क्या करें निवेशक- India TV Hindi

बाजार की तेजी में भी ये मिडकैप-स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स दे रहे है निगेटिव रिटर्न्स, क्या करें निवेशक

नई दिल्ली। शेयर बाजार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन बाजार की इस तेजी में कई मिडकैप और स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स ऐसे है जो निगेटिव रिटर्न दे रहे है। खासकर रिलायंस का मिड-स्मॉलकैप फंड, L&T मिडकैप फंड, DSP बीआर स्मॉल-मिडकैप और सुंदरम सिलेक्ट मिडकैप ने पिछले एक महीने में 3 फीसदी का निगेटिव रिटर्न दिया है। ऐसे में सवाल उठता है, कि अब घरेलू निवेशकों को क्या करना चाहिए। इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि हाल में आई गिरावट से घबराना चाहिए। GST लागू होने के बाद और अच्छे मानसून के चलते मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में फिर से तेजी लौटेगी। यह भी म्यूचुअल फंडस पढ़े: देश के अमीर भी अब लगा रहे म्युचूअल फंड में पैसा, आप भी छोटी रकम पर ऐसे पाएं मोटा मुनाफा

अब क्या करें निवेशक

वाइजइन्वेस्ट एडवाइजर के हेमंत रुस्तगी का कहना है कि मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेशको को घबराने की जरुरत नहीं है। इक्विटी में लंबी अवधि के लिए निवेश करें। क्योंकि लंबी अवधि के निवेश पर उतार-चढ़ाव का असर कम होता है। छोटी-मध्यम अवधि निवेश पर उतार-चढ़ाव का असर ज्यादा है जिसके चलते बाजार को नहीं बल्कि लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश करने की सलाह होगी। बाजार की इस तेजी में मौजूदा निवेशकों को निवेश पोर्टफोलियो को बैलेंस रखना जरूरी है। मिड और स्मॉलकैप में ज्यादा निवेश है तो पोर्टफोलियो को बैलेंस करें। मिड और स्मॉलकैप की जगह कुछ लार्जकैप और मल्टीकैप फंड्स को जोड़ सकते है। जिन निवेशकों का छोटी अवधि का नजरिया है उन्हें फंड के प्रदर्शन के आधार पर फंड ना चुनें। निवेश से पहले फंड के साथ जुड़े जोखिम को समझना बेहद जरुरी है।

ऐसे में आप भी अपना सकते है ये स्ट्रैटजी

1.एक फंड से दूसरे फंड में शिफ्ट होना जरूरी

2.अंडरपरफॉर्मर को पहचाने का तरीका

इन्वेस्टर्स की सबसे बड़ी मुश्किल होती है, पोर्टफोलियों में अंडरपरफॉर्मर को पहचाना। इसकी पहचान के लिए एक्सपर्ट कहते हैंं कि हर क्वार्टर में इन्वेस्टर्स को रिटर्न चेक करने चाहिए। अगर किसी फंड का रिटर्न बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले अच्छा रिटर्न दे रहा है और अगले दो क्वार्टर में भी इसकी परफॉर्मेंस इंडेक्स के बराबर ही रहने पर इन्वेस्टर्स को निवेशित रहना चाहिए। वहीं, अगर फंड्स अंडरपरफॉर्म करता है, तब फंड्स से बाहर निकलना सही होगा।#ModiGoverment3Saal: मोदी के कार्यकाल में निवेशक हुए मालामाल, ऐसे 5 हजार रुपए लगाकर कमाए 3 लाख

3.समय-समय पर फंड्स निकालना सही रणनीति

मान लीजिए इन निगेटिव फंड्स में आपने एक लाख रुपया लगाया होता तो पांच साल में आपकी रकम करीब 1.20 लाख रुपए हो जाती, जो कि एक औसत रिटर्न है। इस पर बजाज कैपिटल के सीईओ अनिल चोपड़ा कहते हैंं कि समय-समय पर फंड्स से रकम निकालनी चाहिए।

ऐसे चुने अच्छे फंडस

बाजार में हजारों म्‍यूचुअल फंड की स्‍कीम चल रही हैं। सभी दावा करती हैं कि वेे सबसे अलग हैं। यही कारण होता है कि निवेशक बिना सोचे समझे म्‍यूचुअल फंड का चयन कर लेता है, जोकि आगे चलकर समस्‍या बन जाता है। हम आपकी इस समस्‍या का हल यहां पर करेंगे। आप सिर्फ कुछ नियमों का पालन कर अच्‍छे म्‍यूचुअल फंड का चुनाव कर निवेश कर सकते हैं। म्‍यूचुअल फंड के चयन में चार बातों को ध्‍यान में रखना होता है- परफॉर्मेंस, रिस्‍क, मैनेजमेंट और कॉस्‍ट।#ModiGoverment3Saal: सोने से रूठी ‘लक्ष्मी’, जुलाई तक हो सकता है 1100 रुपए सस्ता

1.परफॉर्मेंस

जानकारों का कहना है कि आप सेब और संतरे की तुलना नहीं कर सकते, भले ही दोनों फल हैं। ठीक इसी प्रकार दो म्‍यूचुअल फंड की तुलना करना आसान नहीं होता। आप इक्विटी फंड की तुलना डेब्‍ट फंड से या इनकम फंड की ग्रोथ फंड से नहीं कर सकते। लिहाजा किसी भी म्‍यूचुअल फंड की तुलना करने से पहले उनके प्रारूप को ध्‍यान से देख लें। समान प्रारूप वाले फंड की ही तुलना की जा सकती है। अलग-अलग कंपनियों के समान प्रारूप के म्‍यूचुअल फंड की तुलना करते वक्‍त बाजार में उनकी परफॉर्मेंस देखें। जो बाजार में अच्‍छा चल रहा हो, उसी को चुने। लेकिन हां यहां भी आंख मूंद कर फैसला न करें। इसके रिस्‍क फैक्‍टर को ध्‍यान से पढ़ें।

2.रिस्‍क

लोगों के बीच यह धारणा है कि म्‍यूचुअल फंड एक ऐसा निवेश होता है, जिसमें जितना रिस्‍क लेंगे, उतना ज्‍यादा रिटर्न (धन) आपको मिलेगा। यह धारणा बिलकुल गलत है। कोई भी म्‍यूचुअल फंड इस स्ट्रैटजी पर काम नहीं करता है। बेहतर होगा यदि आप कम रिस्‍क वाले ही म्‍यूचुअल फंड लें, ताकि धीरे-धीरे अच्‍छी मात्रा में रिटर्न मिल सके। इसका आंकलन करने म्यूचुअल फंडस के लिए समान श्रेणी के दो म्‍यूचुअल फंड की तुलना करें वो भी उस समय में जब बाजार में तेजी से उछाल आया हो या गिरावट आयी हो। उससे आप आसानी से दोनों में बेहतर चुन सकते हैं। दोनों के रिटर्न की तुलना करके आप म्‍यूचुअल फंड को चुन सकते हैं।एक साल में बैंकिंग म्यूचुअल फंड्स में मिले 60% के बड़े रिटर्न, आपके पास भी है मौका

3.मैनेजमेंट

म्‍यूचुअल फंड बाजार जैसे- शॉर्ट टर्म, इनकम फंड, इंडेक्‍स फंड, आदि। इनमें कई ऐसे होते हैं जो मैनेजर पर निर्भर नहीं करते। सभी के परिणाम लगभग समान होते हैं। हां इक्विटी फंड में फंड मैनेजमेंट काफी महत्‍वपूर्ण होता है। आपकी जरा सी चूक आपको घाटा पहुंचा सकती है। इस फंड में तभी पैसा लगाये, जब आप इसके अच्‍छे जानकार हों। रिस्‍क लेने से पैसा डूब सकता है।ऑप्टिमा मनी मैनेजर के मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज मठपाल का कहना है कि फंड मैनेजर निवेश की रणनीति तय करता है जो सेक्टर और शेयर का चुनाव करते है। निवेश से पहले फंड मैनेजर का प्रदर्शन देखना चाहिए। हर एक फंड मैनेजर का निवेश का तरीका अलग होता है। मैनेजर बदलने के बाद जल्दबाजी में फंड से निकलना ठीक नहीं है। म्यूचुअल फंड्स के इन फेवरेट शेयरों ने दिया 900% तक का रिटर्न, आपके पास भी है मौका

4.कॉस्‍ट

अंतिम तथ्‍य होता है कॉस्‍ट यानी कीमत। इस बात को हमेशा ध्‍यान रखें कि म्‍यूचुअल फंड कोई नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन या चैरिटी नहीं है। हर कंपनी अपना नफा-नुकसान सोच कर आगे बढ़ती है। म्‍यूचुअल फंड में निवेश करते वक्‍त आपको तमाम तरह के हिडेन चार्ज होते हैं। उनके बारे में पता लगाने के लिए फंड की टर्म एंड कंडीशन जरूर पढ़ें। म्‍यूचुअल फंड में निवेश करने वाला मूल धन ब्‍याज के साथ एक निश्चित समय-अंतराल पर बढ़ता या घटता है। उस समय अंतराल का और दरों का हमेशा हिसाब अपनी डायरी में रखें।

AMC Stocks क्या होते हैं? Asset management compny की सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में।

AMC (Asset Management Company) कंपनियां वह होती है, जो आप और मेरे जैसे रिटेल निवेशकों से पैसा इकट्ठा करके उसे, उन निवेशकों की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग एसेट में निवेश करती हैं। यह AMC ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी की सिंपल परिभाषा है। एएमसी जो काम अपने निवेशकों के बिहाफ पर करती हैं, उसके लिए वह अपने ग्राहकों से कुछ पैसे फीस के रूप में चार्ज भी करती है।

एमसी अपने ग्राहकों से जो फीस लेती हैं उसे एक्सपेंशन रेश्यो (expansion ratio) के नाम से जाना म्यूचुअल फंडस जाता है। इस आर्टिकल में AMC Stocks क्या होते हैं? Asset management compny की सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में। के बारे में विस्तार से बताया गया है। चलिए जानते हैं- AMC stocks in India in Hindi

AMC Stocks in India

एएमसी कंपनी के कार्य

एएमसी स्टॉक्स के बारे में जानने से पहले AMC कंपनियां क्या कार्य करती है? यह भी जानना बहुत जरूरी है। एएमसी कंपनियां के ग्राहक बहुत ज्यादा होते हैं इसलिए वह प्रत्येक ग्राहक से व्यक्तिगत रूप से पूछकर उसके अनुसार, उसका पोर्टफोलियो नहीं बना सकती है। शेयर मार्केट में सीएमपी (CMP) current market price क्या होता है?

इसी वजह से AMC खुद के म्यूच्यूअल फंड्स निकालती हैं, यह कंपनियां अपने ग्राहकों से कहती हैं कि आप अपनी जरूरत के हिसाब से म्यूचुअल फंड चुनकर उसमें पैसा निवेश करिए। जैसे कि आईसीआईसीआई बैंक की अपनी खुद की एएमसी है। निवेशक आईसीआईसीआई बैंक की या अन्य किसी बैंक की एएमसी में जाकर ऑनलाइन जाकर चेक कर सकता है कि उसे किस म्यूच्यूअल फंड में अपना पैसा निवेश करना है।

आपने आईसीआईसीआई या जिस भी किसी AMC के बारे में आपने सर्च किया है। उसके म्यूचुअल फंडस के, कई तरह के विकल्प आपके सामने होते हैं। आप अपनी जरूरत और रिस्क उठाने की क्षमता के अनुसार, निवेश करने के लिए म्यूच्यूअल फंड चुन सकते हैं। enny Stocks में एक हजार रूपये इन्वेस्ट करके एक लाख कैसे कमाए?

अपने लिए सही Mutual Fund कैसे चुने?

अगर कोई निवेशक ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहे और स्टेबल रिटर्न चाहता हो, तो वह लार्ज कैप म्युचुअल फंड्स (Large-cap mutual funds) में अपना पैसा निवेश कर सकता है। इसके विपरीत यदि कोई निवेशक जिसकी रिस्क उठाने की क्षमता ज्यादा है और वह अपने निवेश पर ज्यादा रिटर्न चाहता है। ऐसे निवेशक को स्मॉल कैप म्यूच्यूअल फंड में अपना पैसा निवेश करना चाहिए।

Small-Cap फंड्स इस पूरी तरह स्टॉक मार्केट के ऊपर निर्भर होते हैं, जब शेयर बाजार गिरता है तब ये फंड्स अन्य फंड्स के मुकाबले ज्यादा गिरावट होती है। यानी ज्यादा नुकसान होता है। जब स्टॉक मार्केट बुल रन में होता है, तब स्माल-कैप म्यूच्यूअल फंड्स अन्य सभी फंड्स से ज्यादा अच्छा रिटर्न देते हैं।

बैलेंस म्यूच्यूअल फंड म्यूचुअल फंडस (Balance mutual funds) यदि कोई निवेशक रिस्क कम लेना चाहता है और ज्यादा रिटर्न भी नहीं चाहता। तो ऐसे निवेशक को बैलेंस म्यूच्यूअल फंड में अपना पैसा निवेश करना चाहिए। इस तरह AMC अपने ग्राहकों को उनकी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तरह के म्यूच्यूअल फंड्स के विकल्प प्रोवाइड करती है।

अब यह निवेशक के ऊपर निर्भर करता है कि वह किस एएमसी के, किस म्यूच्यूअल फंड् अपना पैसा निवेश करना चाहता है। इंट्राडे ट्रेडिंग कैसे करें और इससे रोज पैसे कैसे कमायें?

अपने लिए सही एएमसी कैसे चुने?

अपना पैसा निवेश करने के लिए आपको, एएमसी की रेपुटेशन यानी साख को ध्यान में रखना चाहिए। अच्छी फार्म में ही अपने पैसे को निवेश करना चाहिए AMC, सेबी में रजिस्टर्ड है या नहीं यह भी चेक करना चाहिए। साथ ही एएमसी कितने सालों से इस क्षेत्र में काम कर रही है, यह भी आपको जानना चाहिए। इससे आप यह अनुमान लगा सकते हैं कि आप अपना पैसा निवेश करने के लिए सही हाथों में दे रहे हैं या नहीं।

फंड मैनेजर

आप को एएमसी के फंड मैनेजर का बैकग्राउंड जरूर चेक करना चाहिए क्योंकि आपका म्यूच्यूअल फंड कैसे परफॉर्मेंस करेगा। यह फंड मैनेजर के ऊपर ही निर्भर करता है क्योंकि फंड मैनेजर ही फंड के शेयर खरीदने और बेचने का निर्णय करते हैं। फंड मैनेजर की परफॉर्मेंस देखने के लिए आपको उसके पिछले रिकॉर्ड को चेक करना चाहिए। ताकि आपको पता चल सके कि आप को इस फंड में निवेश करने पर कितना रिटर्न मिल सकता है।

AMC की फीस

एएमसी एक्सपेंशन रेश्यो के नाम पर आपसे फीस वसूल करती है। आमतौर पर एक्सपेंशन रेश्यो एक से कम होता है, इसी को अच्छा माना जाता है। एक्सपेंस रेश्यो एक से कम होने पर, आपके प्रॉफिट में से जो पैसा कटेगा वह कम कटेगा। जब भी आप एएमसी का चुनाव करें, तो उसकी साख और फंड मैनेजर के पिछले परफॉर्मेंस पर भी जरूर ध्यान देंना चाहिए। यदि आप म्यूच्यूअल के बारे में विस्तार जानना चाहते हैं तो आप डॉ योगेश शर्मा द्वारा लिखित बुक म्यूच्युअल फंड्स में INVESTMENT द्वारा मुनाफा कैसे कमाए को पढ़ सकते हैं।

एएमसी की फीस (एक्सपेंशन रेश्यो) हो जरूर ध्यान में रखना चाहिए। इसके बाद ही अपने पैसे को इन्वेस्ट करना चाहिए। अब आपके मन में एक सवाल उठ रहा होगा, क्या AMC के द्वारा म्यूचुअल फंड में निवेश करने पर आपका पैसा सुरक्षित रहेगा? इसका जवाब हां है, क्योंकि Asset management company का सेबी रजिस्टर्ड होती है और यह उनके लिए अनिवार्य होता है।

जो एएमसी सेबी में रजिस्टर्ड होती है। उसके माध्यम से अपना पैसा निवेश करना सुरक्षित रहता है क्योंकि सेबी स्टॉक मार्केट और AMC की निगरानी करने वाली सरकारी संस्था है। जिसकी वजह से आपका पैसा सुरक्षित रहता है। SIP के जादू का उपयोग करके पावर ऑफ़ कम्पाउंडिंग से अमीर कैसे बनें?

AMC stocks in India (एमसी स्टॉक्स इन इंडिया)

जो एएमसी (ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी) स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होती है । उनके स्टॉक्स को एएमसी स्टॉक्स कहा जाता है। यह तो आप जानते ही होंगे कि स्टॉक मार्केट में कंपनियां आईपीओ के द्वारा लिस्ट होती है। Initial Public Offering (IPO) क्या है और यह कैसे काम करता है?

भारतीय शेयर बाजार में बहुत सारी एएमसी कंपनियां लिस्ट हैं। जिनके शेयरों में आप चाहे लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करें या शार्ट के लिए, यह आपकी मर्जी पर निर्भर करता है। भारतीय स्टॉक मार्केट में बहुत सारी AMC लिस्ट हैं, कुछ सबसे अच्छी एएमसी निम्नलिखित हैं -

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